सोहागपुर क्षेत्र में एटक की दोहरी ऐतिहासिक जीत: 826 सेवानिवृत्त श्रमिकों को मिला Revised PPO, जुलाई के रिटायर कर्मचारियों को मिली रुकी हुई ग्रेच्युटी

 


2015-16 से भटक रहे थे श्रमिक, हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं हो रही थी सुनवाई_

मोहम्मद हारून धनपुरी।

धनपुरी एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र में AITUC ने एक नहीं, दो ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर साबित कर दिया कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। संगठन के कड़े प्रयासों से 2015-16 से लंबित पड़े  826 सेवानिवृत्त श्रमिकों के Revised PPO का समाधान हुआ है और जुलाई माह में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की महाप्रबंधक द्वारा बिना No Dues के रोकी गई ग्रेज्युटी का भुगतानभी बिना किसी भेदभाव के कराया गया है।जानकारी के अनुसार 826 बुजुर्ग श्रमिक साथी पिछले 8-9 सालों से अपने Revised PPO के लिए दर-दर भटक रहे थे। कई साथियों ने हजारों रुपए खर्च कर दिए, दलालों और कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई पूछने वाला तक नहीं था। श्रमिक पूरी तरह से निराश हो चुके थे।

जब यह मामला सोहागपुर क्षेत्र एटक के संज्ञान में आया, तो संगठन ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया।

इस अवसर पर क्षेत्र अध्यक्ष कामरेड रावेन्द्र शुक्ला जी ने कहा साथियों, हमारे 826 बुजुर्ग साथी 2015-16 से हजारों रुपया खर्च करने के बाद भी PPO के लिए भटक रहे थे, कोई पूछता तक नहीं रहा। यह देखकर दिल में पीड़ा हुई। हमने ठाना कि जब तक एक-एक साथी का काम नहीं होगा, हम चैन से नहीं बैठेंगे। आज जब 826 लोगों को Revised PPO मिला है और उनके चेहरे खिले हैं, तो लगता है हमारी मेहनत सफल हुई।

वहीं क्षेत्र के सचिव कामरेड राजेशचन्द्र शर्मा ने दूसरी बड़ी जीत पर प्रकाश डालते हुए कहा 

साथियों, दूसरी लड़ाई जुलाई माह में रिटायर हुए साथियों की थी। महाप्रबंधक ने बिना No Dues के उनकी ग्रेच्युटी का भुगतान रोक दिया था। महीनों तक भुगतान नहीं हो पा रहा था, परिवार परेशान थे। एटक यूनियन ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और बिना किसी भेदभाव के सभी साथियों की ग्रेच्युटी का भुगतान कराया। एटक के लिए हर श्रमिक बराबर है, चाहे वह किसी भी संगठन से हो। बताया जाता है कि जैसे ही 826 लोगों को Revised PPO मिलने की खबर लगी, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। सेवानिवृत्त श्रमिकों के चेहरे खिल उठे। कई बुजुर्ग साथियों की आंखों में खुशी के आंसू थे। सभी ने एक स्वर में एटक यूनियन का बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया है।

पदाधिकारियों ने कहा कि यह सफलता इस कहावत को चरितार्थ करती है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

एटक का नारा है नौकरी के साथ भी और नौकरी के बाद भी।* संगठन ने साबित किया है कि वह केवल नौकरी के समय ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी श्रमिकों के सम्मान और अधिकार के लिए लड़ता है। इसी कार्यप्रणाली को देखकर आज दूसरे संगठनों में रहे साथी भी एटक से जुड़ रहे हैं।

AITUC जिंदाबाद! श्रमिक एकता जिंदाबाद!

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