जमीलुर्रहमान शहडोल। आम नागरिकों को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश तथा अभिहित अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा जिले में औचक निरीक्षण और नमूना संग्रह की कार्रवाई की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों की यह पहल निश्चित रूप से जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस कार्रवाई के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है और निरीक्षण के बाद नियमों के पालन की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित कर रहा है?
इसी क्रम में खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने जैतपुर, ओपीएम अमलाई, धनपुरी और बुढ़ार क्षेत्र में 20 से अधिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रैपिड किट के माध्यम से दूध, पनीर, दही, विभिन्न मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग की गई।
कई प्रतिष्ठानों से लिए गए खाद्य नमूने
विस्तृत गुणवत्ता जांच के लिए जैतपुर स्थित प्रकृति स्वीट मार्ट से मिल्क केक, ओपीएम अमलाई के प्रिया रेस्टोरेंट से मावा बर्फी, मॉडर्न डेली नीड्स से दूध तथा श्रीवास्तव जलपान गृह से पनीर के नमूने लिए गए।
इसी तरह धनपुरी के शिवानी रेस्टोरेंट से पेड़ा, सुभाष मिष्ठान से कलाकंद, अभिनंदन रेस्टोरेंट से खोवा और सेव तथा जोधपुर स्वीट्स से मावा बाटी और नमकीन के नमूने विधिवत एकत्र कर सील किए गए। इन नमूनों को विस्तृत विश्लेषण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। वहीं, मौके पर अनियमितता पाए जाने पर शिवानी रेस्टोरेंट को सुधार नोटिस जारी किया गया।
सिर्फ निरीक्षण नहीं, कार्रवाई के परिणाम भी सामने आने चाहिए
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य कारोबारियों के लिए सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना अनिवार्य है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निरीक्षण और नमूना संग्रह करने का अधिकार है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
ऐसे में सवाल यह है कि जिन प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए हैं, उनकी प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद क्या कार्रवाई की जाएगी? यदि किसी नमूने में मिलावट या निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कितनी शीघ्र होगी? क्या जारी किए गए सुधार नोटिस के अनुपालन की दोबारा जांच भी की जाएगी?
रैपिड किट से होने वाली जांच प्रारंभिक स्क्रीनिंग है, इसे अंतिम प्रयोगशाला निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। इसलिए नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
अधिकारियों की पहल को मिले परिणामों का आधार
कलेक्टर पार्थ जायसवाल और अभिहित अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा के निर्देशन में हो रही कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इस अभियान की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब निरीक्षण नियमित हों, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले। केवल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने भेज देना पर्याप्त नहीं है। कार्रवाई करने वाली मैदानी टीम की जवाबदेही, प्रयोगशाला रिपोर्ट पर समयबद्ध कार्रवाई और सुधार के बाद पुनः निरीक्षण भी उतने ही आवश्यक हैं।
जनस्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासन को अभियान की निरंतर समीक्षा करनी चाहिए, ताकि खाद्य सुरक्षा के नाम पर होने वाली कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए और आम नागरिकों का स्वास्थ्य वास्तव में सुरक्षित हो सके।


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