संयुक्त आयुक्त विकास का बुढार जनपद में सघन दौरा, योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, स्कूल में कम उपस्थिति पर जताई नाराजगी

खरला में एक बगिया माँ के नाम योजना में 100 में से 98 पौधे जीवित मिलने पर हितग्राही मुन्नी बाई को दी शाबाशी, पड़खुरी स्कूल में 26 में से 17 बच्चे मिले उपस्थित

मोहम्मद हारुन उत्प्रेरक टाइम्स धनपुरी।

 जिले में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं, इसे परखने के लिए संभागीय अधिकारी खुद मैदान में उतर रहे हैं। इसी क्रम में आज शहडोल संभाग के संयुक्त आयुक्त विकास मुद्रिका सिंह ने जनपद पंचायत बुढार के ग्राम खरला और पड़खुरी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन का बारीकी से परीक्षण किया।

खरला में दिखी योजना की सफलता की कहानी

निरीक्षण की शुरुआत ग्राम खरला से हुई, जहाँ मुद्रिका सिंह सीधे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना एक बगिया माँ के नाम की हितग्राही मुन्नी बाई के घर पहुंचे। उन्होंने हितग्राही द्वारा लगाए गए बगिया का गहन अवलोकन किया। मुन्नी बाई से चर्चा के दौरान पता चला कि उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से 100 फलदार पौधे उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने पूरे उत्साह के साथ बताया कि उन्होंने सभी पौधों को अपनी बाड़ी में रोपित किया और माँ की तरह उनकी देखभाल की। परिणाम स्वरूप आज 100 में से 98 पौधे जीवित हैं और लहलहा रहे हैं। इस उपलब्धि पर संयुक्त आयुक्त श्री सिंह ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को सशक्त बनाने का एक अभिनव प्रयास है। मुन्नी बाई जैसी जागरूक हितग्राही ही इस योजना की असली सफलता हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि ऐसे सफल हितग्राहियों को अन्य गांवों में उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जाए।

प्राथमिक शाला पड़खुरी में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इसके बाद संयुक्त आयुक्त सिंह का काफिला प्राथमिक शाला पड़खुरी पहुंचा। यहाँ उन्हें शिक्षा व्यवस्था में खामियां नजर आईं। विद्यालय के अभिलेखों के अनुसार कुल 26 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन निरीक्षण के समय मात्र 17 बच्चे ही कक्षा में उपस्थित मिले। यानी 9 बच्चे बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे। इस पर श्री सिंह ने गहरी नाराजगी जाहिर की और शाला के प्राचार्य से जवाब-तलब किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक अभिभावकों के घर जाकर संपर्क करें। मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन नियमानुसार और गुणवत्तापूर्ण हो। बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए विशेष कक्षाएं लगाई जाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे गांव के हर बच्चे को स्कूल से जोड़े रखें।

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