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देश की ऊर्जा राजधानी और कोयला उद्योग की अग्रणी इकाई साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने स्वर्णिम इतिहास की रचना कर दी है। कंपनी ने वर्तमान वित्त वर्ष में दस करोड़ टन कोयला प्रेषण के अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही कंपनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे सशक्त आधारशिला है।
अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने व्यक्त किया हर्ष
इस गौरवमयी अवसर पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने समस्त परिवार को हार्दिक बधाई प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, अपितु राष्ट्र के प्रति हमारे अटूट समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। यह सफलता सुविचारित खनन योजना, आधुनिकतम तकनीक, प्रथम मील संपर्क परियोजनाओं और सभी कर्मयोगियों के सामूहिक परिश्रम का प्रतिफल है।
निदेशक मानव संसाधन बिरंची दास ने की सराहना
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के निदेशक मानव संसाधन बिरंची दास ने कहा कि कंपनी की वास्तविक शक्ति उसका मानव संसाधन है। खदानों के भीतर विषम परिस्थितियों में अहर्निश कार्य करने वाले हमारे कोयला योद्धाओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिक बंधुओं के अदम्य साहस से ही यह लक्ष्य प्राप्त हो सका है।
सोहागपुर क्षेत्र में हर्ष की माहौल
इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक बी. के. जेना ने हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पूरे कंपनी परिवार के लिए गौरव का क्षण है। सोहागपुर क्षेत्र ने भी इस लक्ष्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने क्षेत्र के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सफलता की वजह बताया है। वहीं सोहागपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक बलराम हेम्ब्रम ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सामूहिक नेतृत्व और टीम भावना की विजय है। अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन के कुशल नेतृत्व, निदेशक मानव संसाधन बिरंची दास के प्रेरणादायी मार्गदर्शन और महाप्रबंधक बी. के. जेना के दिशा-निर्देशन में सोहागपुर क्षेत्र निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
देश की ऊर्जा का आधार
उल्लेखनीय है कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक इकाई है। देश के कुल कोयला उत्पादन में कंपनी का योगदान लगभग एक चौथाई है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में स्थित इसकी खदानों से उत्पादित कोयला देश के अनेक ताप विद्युत गृहों, इस्पात और सीमेंट कारखानों की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति करता है, जिससे करोड़ों घरों में प्रकाश पहुंचता है।


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