आज से शारदीय नवरात्र, नौ दिन तक होगी मां के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना,
मां दुर्गा की उपासना का सबसे पवित्र पर्व शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान घरों में कलश स्थापना, अखंड ज्योत, कन्या पूजन और दुर्गा सप्तशती पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि में कलश स्थापना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और जातक को मनवांछित फल प्रदान करती हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पावन पर्व के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी और घरों में घटस्थापना कर श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करेंगे। नवरात्र का समापन 20 अक्तूबर को दशहरे के साथ होगा…
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच आती हैं और सच्चे मन से की गई आराधना से सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्र के प्रत्येक दिन मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से माता की आराधना करते हैं।
घटस्थापना के शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र के पहले दिन 11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह छह बजकर 19 मिनट से दस बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा, स्थानीय पंचांग के अनुसार इन मुहूर्तों में घटस्थापना कर सकते हैं।
शक्ति और नई शुरुआत
मां शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में पूजित मां शैलपुत्री दृढ़ता, साहस और स्थिरता की प्रतीक हैं। इनकी पूजा जीवन में संकल्प और आत्मबल का संदेश देती है।
मां ब्रह्मचारिणी मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कठिन साधना, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
मां चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा का दुष्ट शक्तियों के विनाश और भक्तों की रक्षा से जुड़ा है। वे साहस के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।
मां कूष्मांडा मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। उनका स्वरूप सृजनात्मक ऊर्जा, प्रकाश और जीवन शक्ति का प्रतीक है ।
मां महागौरी मां महागौरी निर्मलता, क्षमा और शांति की प्रतीक हैं। उनकी पूजा आत्मशुद्धि, और जीवन में शांति की कामना से की जाती है।
मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजित मां स्कंदमाता ममता, संरक्षण और नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतीक हैं। इनकी आराधना में मातृशक्ति के कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण किया जाता है।
मां कात्यायनी मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी के शक्तिशाली स्वरूप से जोड़ा जाता है। वे अन्याय के अंत, धर्म की रक्षा और अधर्म पर विजय की प्रतीक हैं।
मां कालरात्रि मां कालरात्रि का उग्र स्वरूप बुरी शक्तियों के विनाश और भय से मुक्ति का प्रतीक है। उनका संदेश है कि अंधकार कितना भी गहरा हो, शक्ति और साहस से उसका सामना किया जा सकता है।
मां सिद्धिदात्री मां सिद्धिदात्री को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। वे ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक हैं। नवरात्र के अंतिम दिन उनकी पूजा साधना की पूर्णता और देवी के समग्र स्वरूप का स्मरण कराती है।


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