मोहम्मद हारून उत्प्रेरक टाइम्स धनपुरी।
कोयला मजदूरों के परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवॉर्ड (पीएलआर) यानी सालाना बोनस की ₹1,10,250 की राशि को लेकर चल रही बहस के बीच हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि बोनस की मौजूदा राशि को कम बताने से पहले श्रमिक संगठनों और नेताओं को पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले जब बोनस तय होता था, तब उत्पादन में बढ़ोतरी या कमी के बावजूद बोनस में होने वाली वृद्धि कई बार सीमित रही है।
वर्षवार आंकड़े
उस्मानी के मुताबिक वर्ष 2020 में कोल इंडिया लिमिटेड के कोयला उत्पादन में 4.85 मिलियन टन की कमी आई, फिर भी बोनस में ₹3,800 की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2020-21 में उत्पादन 5.918 मिलियन टन कम रहा, फिर भी बोनस में ₹4,000 बढ़ाए गए। वर्ष 2021-22 में उत्पादन 26.414 मिलियन टन बढ़ा, लेकिन बोनस में केवल ₹4,000 की वृद्धि हुई और राशि ₹72,500 से बढ़कर ₹76,500 हुई। वर्ष 2022-23 में उत्पादन करीब 80 मिलियन टन (11.46 प्रतिशत) बढ़ा और बोनस में ₹8,500 की वृद्धि हुई। अगले वर्ष 2023-24 में उत्पादन करीब 70 मिलियन टन बढ़ने के बावजूद बोनस में मात्र ₹250 की वृद्धि हुई और यह ₹8,750 हुआ। उस्मानी ने सवाल उठाया कि उस समय उत्पादन वृद्धि और बोनस वृद्धि के अनुपात को लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए गए।
राष्ट्रीयकरण के बाद बोनस में कमी नहीं
उस्मानी ने दावा किया कि कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद बोनस में कमी का इतिहास नहीं रहा है। वर्ष 2008-09 में बोनस में ₹1,650 की वृद्धि हुई थी, जो उनके अनुसार सबसे कम बढ़ोतरी में से एक थी, लेकिन राशि फिर भी बढ़ी थी। वर्ष 2024-25 में कोयला उत्पादन 7.40 मिलियन टन बढ़ा, पर बोनस में ₹500 की वृद्धि हुई और यह ₹9,250 बढ़कर हुआ। वहीं 2025-26 में उत्पादन में 12.86 प्रतिशत की गिरावट आई और कोल इंडिया के लाभ में करीब ₹3,700 करोड़ की कमी का हवाला देते हुए प्रबंधन पिछले वर्ष के बराबर बोनस देने की स्थिति में था।
विपरीत परिस्थितियों में उपलब्धि
उस्मानी के अनुसार मैनपावर में कमी, सेल रियलाइजेशन में बदलाव तथा उत्पादन और लाभ में गिरावट जैसी परिस्थितियों के बावजूद ₹1,10,250 की राशि हासिल होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्तर बताया। उन्होंने हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू की भूमिका का भी उल्लेख किया। उस्मानी ने कहा कि सिद्धू को विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, पे-कमीशन तथा ईपीएफ बोर्ड ऑफ ट्रस्टी से जुड़े विषयों में अनुभव रहा है। भारत सरकार द्वारा कोड ऑन वेजेस, 2019 के तहत गठित नेशनल बोर्ड में भी उन्हें सदस्य नियुक्त किया गया है।
12वें वेतन समझौते की तैयारी का आह्वान
अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि बोनस के मुद्दे पर बहस से आगे बढ़ते हुए अब कोयला मजदूरों को 12वें दौर के वेतन समझौते की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उनके अनुसार मजदूरों की उम्मीदें आगामी वेतन समझौते में सम्मानजनक परिणाम पर टिकी हैं।उन्होंने श्रमिकों से आह्वान किया कि वे अपने सम्मान, गरिमा और बेहतर वेतन समझौते के लिए संगठित होकर संघर्ष की तैयारी करें। उस्मानी ने कहा कि आने वाले दौर में मजदूर हितों की रक्षा के लिए एकजुटता और मजबूत संगठनात्मक तैयारी आवश्यक होगी।


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