ग्राम रामपुर-अतरिया-बिछिया-खैरवना में किसान आंदोलन तेज, अनशन मे जनपद सदस्य चंद्र कुमार तिवारी और कांग्रेस का समर्थन, DRCC के एक साल बाद भी रोजगार नहीं


मोहम्मद हारून उत्प्रेरक टाइम्स धनपुरी। 

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत रामपुर बटुरा OCM प्रभावित क्षेत्र में आंदोलन तेज हो गया है। रामपुर-अतरिया, बिछिया, खैरवना में क्षेत्रीय एकता मंच के बैनर तले इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ चल रहा।अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन आज और तेज हो गया है। क्षेत्रीय युवाओं के रोजगार, किसानों की जमीन के उचित मुआवजे, नौकरी, बसावट और अन्य विकास कार्यों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह अहिंसात्मक आंदोलन अब धीरे-धीरे जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। आंदोलन स्थल पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में किसान, युवा और महिलाएं पहुंच रही हैं। आज आंदोलन को और बड़ी ताकत मिली जब जनपद सदस्य एवं सभापति वन समिति श्री चंद्र कुमार तिवारी और सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा* अपने साथियों के साथ समर्थन देने अनशन स्थल अतरिया पहुंचे। फोटो में दिख रहे सभी साथियों के साथ उन्होंने मंच पर बैठकर आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई न्यायिक लड़ाई है और इस अहिंसात्मक आंदोलन में हम सभी साथ हैं। आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि खदान प्रभावित हर गांव के व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए। SECL प्रबंधन को विस्थापितों की पीड़ा समझनी होगी। वहीं इसके पूर्व कांग्रेस पार्टी ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया था। कांग्रेस के समर्थन के बाद आंदोलन को राजनीतिक मजबूती भी मिली है।


उक्त कार्यक्रम में मध्यप्रदेश कांग्रेस के संयुक्त सचिव प्रदीप सिंह, जिला उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, नगर अध्यक्ष बुढार हर्ष पाठक, नगर अध्यक्ष बकहो जवाहर राव, पूर्व अध्यक्ष पवन सोनी, पुष्पेंद्र शर्मा, अभिषेक सिंह मम्मू, अनिरुद्ध सिंह, अजय शर्मा, बिहारीलाल साहू, रामावतार मिश्रा, नीलू राव, जयप्रकाश राव, रामनरायण राव* सहित सैकड़ों क्षेत्रीय युवा, किसान और आंदोलन के समर्थक मौजूद रहे थे। सभी ने एक स्वर में SECL प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। आंदोलनकारियों ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है जो अब तक छूट रहा था और जो सबसे ज्यादा आक्रोश का कारण बना हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है कि  DRCC हुए 1 वर्ष हो गया है, अभी तक रोजगार प्रारंभ नहीं किया गया है, इसे तत्काल प्रारंभ किया जाए।* जमीन अधिग्रहण के बाद कई परिवारों ने अपनी जमीन SECL को दे दी, DRCC की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन, मेडिकल आदि एक साल पहले पूरा हो चुका है, लेकिन एक साल बाद भी उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है। यह मुद्दा अब प्रमुख मांगों में शामिल कर लिया गया है।


आंदोलन की मुख्य 3 मांगें इस प्रकार हैं

 SECL में सीधी नौकरी, जय अंबे में नहीं: SECL सोहागपुर क्षेत्र रामपुर बटुरा OCM में जमीन अधिग्रहण के एवज में और आसपास के बेरोजगार युवकों को आउटसोर्सिंग कंपनी जय अंबे में नहीं, बल्कि सीधे SECL द्वारा निर्धारित पे-स्केल, डीए, एचआरए और सारी सुविधाओं के साथ कंपनी रोल में नौकरी दी जाए। जय अंबे में 8 से 10 हजार रुपये में 12 घंटे काम कराकर युवाओं का शोषण बंद किया जाए। DRCC के बाद तत्काल रोजगार: जिन प्रभावितों का DRCC एक साल पहले हो चुका है, उन्हें तत्काल नियुक्ति पत्र देकर ड्यूटी पर रखा जाए। जमीन का उचित मुआवजा और बसावट: जमीन के बदले बाजार दर पर उचित मुआवजा और पुनर्वास कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल जैसी सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ बसावट दी जाए। क्षेत्रीय एकता मंच का साफ कहना है कि कोयला इस धरती से निकल रहा है, प्रदूषण हम झेल रहे हैं, जमीन हमने दी है तो रोजगार का पहला अधिकार भी हमारा है। कांग्रेस नेता प्रदीप सिंह और जनपद सदस्य चंद्र कुमार तिवारी ने भी इसी बात का समर्थन किया कि SECL प्रबंधन को अपनी हठधर्मिता छोड़नी होगी और स्थानीय युवाओं को हक देना होगा। मंच ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह क्रमिक अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। प्रतिदिन अलग-अलग गांवों के युवा बारी-बारी से अनशन पर बैठेंगे।

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