गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल: मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के अंतिम छोर पर बसे रामपुर गांव के उमेश शर्मा को लीवर देने की तैयारी में गुरु, चित्रकूट से पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल झारसा, गुड़गांव (दिल्ली)
मोहम्मद हारून धनपुरी। देश में गुरु के प्रति शिष्य के समर्पण की कहानियां तो बहुत सुनी हैं, लेकिन शिष्य के लिए गुरु के सर्वस्व त्याग की एक मार्मिक कहानी ने पूरे हिंदुस्तान में गुरु-शिष्य परंपरा को पिता-पुत्र के रिश्ते से भी बड़ा साबित कर दिया है। यह कहानी है मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के अंतिम छोर पर बसे रामपुर गांव के रहने वाले उमेश शर्मा की। रामपुर निवासी, किसान नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा के बड़े भाई साहब उमेश शर्मा पिछले लंबे समय से लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। उनका इलाज मेदांता हॉस्पिटल, झारसा, गुड़गांव (दिल्ली) में चल रहा है, जहां डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का अंतिम विकल्प बताया है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने 15 यूनिट ब्लड की तत्काल डिमांड की। जैसे ही यह खबर उनके गुरु, मिश्रा धाम चित्रकूट के डॉ. मनमोहन दास जी महाराज को लगी, वे बिना एक पल गंवाए चित्रकूट धाम से लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय कर सीधे मेदांता हॉस्पिटल झारसा, गुड़गांव (दिल्ली) पहुंच गए और सबसे पहले आगे बढ़कर अपने शिष्य के लिए रक्तदान किया। अस्पताल में मौजूद लोगों के मुताबिक रक्तदान के बाद गुरु जी ने कहा था - जरूरत पड़ी तो मैं अपने शिष्य के लिए लीवर भी दे दूंगा और आज वे अपने वचन पर अडिग हैं। जानकारी के अनुसार अब गुरु जी द्वारा शिष्य को लीवर डोनेट करने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए मेदांता हॉस्पिटल में मेडिकल जांच और सभी जरूरी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। गुरु जी के इस महान त्याग को देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। उनकी इस पहल के बाद शहडोल जिले के अंतिम छोर के छोटे से गांव रामपुर से लेकर दिल्ली-हरियाणा तक के लोग प्रेरित हुए और महज 2 दिन के अंदर ही 15 यूनिट से अधिक ब्लड का इंतजाम हो गया। जिन रक्तवीरों ने रक्त देकर मिश्रा परिवार के जिंनदगी मे खुशियां लाने का प्रयास किया है मिश्रा परिवार
आजीवन आभारी रहेगा
उनका नाम
1. गुरु जी डॉ. मनमोहन दास मिश्रा - चित्रकूट धाम
2. अमित सोनी- गुड़गांव
3. हर्षल सिंह - दिल्ली
4. वेदप्रकाश जी - दिल्ली
5. रवि भाई - हरियाणा
6. आशीष सिंह चौहान - दिल्ली
7. प्रियांश शर्मा
8. नागेश शर्मा
9. रूपेश शर्मा
10. भूपेश शर्मा
11. कमलेश शर्मा
12. ऋषभ गौतम
13. नीरज तिवारी
14. रितेश शर्मा
15. रमन मोलू शर्मा
16. रजनीश शर्मा
17. अनुराग शर्मा
इस नेक काम में आरसीएम परिवार और सर्वोदय परिवार के साथियों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया। शहडोल जिले के अंतिम छोर पर बसे रामपुर गांव से 1000 किलोमीटर दूर दिल्ली के अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए इतनी जल्दी रक्तदाताओं का जुटना अपने आप में मानवता की सबसे बड़ी मिसाल है। किसान नेता व सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा तथा उनके परिवार ने गुरु भगवान डॉ. मनमोहन दास जी महाराज और सभी रक्तवीरों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी ने ब्लड डोनेट कर किसी की जिंदगी में ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी में खुशहाली लाने का काम किया है। हमें पूरा विश्वास है कि आप सभी की दुआओं और गुरु कृपा से हमारे बड़े भाई साहब उमेश शर्मा जल्द स्वस्थ होकर हम सबके बीच होंगे।



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