मुंबई। बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बच्चों-किशोरों पर बढ़ते सामाजिक एवं शैक्षणिक दबाव के बीच मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसी क्षेत्र में काम कर रहीं मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर डॉ. अदिति गुइन बच्चों, किशोरों और अभिभावकों के लिए काउंसलिंग तथा व्यवहार संबंधी सहायता के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। उपलब्ध पेशेवर प्रोफाइल के अनुसार, डॉ. गुइन मुंबई में क्लिनिकल साइकोलॉजी के क्षेत्र से जुड़ी हैं और उनके पास वर्षों का पेशेवर अनुभव है।
बच्चों की जरूरतों को समझने पर जोर
बाल एवं किशोर विकास से जुड़ी समस्याएं हर बच्चे में अलग-अलग रूप में सामने आ सकती हैं। ऐसे में परिवार की परिस्थितियों, बच्चे के व्यवहार और उसकी भावनात्मक जरूरतों को समझना काउंसलिंग प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। डॉ. गुइन के कार्यक्षेत्र में ADHD, सीखने से जुड़ी कठिनाइयां, व्यवहार संबंधी चुनौतियां, चिंता, तनाव और भावनात्मक समस्याओं से जुड़े मामलों में काउंसलिंग एवं व्यवहार संबंधी सहायता शामिल बताई गई है।
पैरेंट-चाइल्ड काउंसलिंग पर विशेष ध्यान
बच्चे के व्यवहार और भावनात्मक विकास पर परिवार के वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से बच्चों के साथ काम करने के साथ-साथ अभिभावकों को भी उचित मार्गदर्शन देना महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दृष्टिकोण में माता-पिता को बच्चे की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने, संवाद सुधारने और सकारात्मक घरेलू वातावरण बनाने के लिए काउंसलिंग का हिस्सा बनाया जाता है।
कॉर्पोरेट और स्कूल वेलनेस में बढ़ती जरूरत
आज स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों में मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। बच्चों और युवाओं में समस्याओं की शुरुआती पहचान तथा समय पर उचित पेशेवर सहायता उपलब्ध कराना परिवार और संस्थानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी
डॉ. अदिति गुइन का कार्य बच्चों, किशोरों और अभिभावकों के बीच मानसिक एवं व्यवहारिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में केंद्रित है। उनका जोर व्यक्तिगत जरूरतों को समझते हुए काउंसलिंग और व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में व्यवहार या भावनात्मक बदलाव लगातार दिखाई दें तो परिवार को इसे केवल अनुशासन की समस्या मानने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेनी चाहिए।


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