मोहम्मद हारून धनपुरी।
एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के अंतर्गत संचालित रामपुर-बटुरा खुली खदान में धूल नियंत्रण की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। खदान में मिट्टी एवं कोयले के उत्खनन और परिवहन का कार्य कर रही निजी कंपनी मेसर्स जय अम्बे द्वारा न तो खदान की आंतरिक सड़कों पर, न ही कार्य स्थलों पर और न ही कोल यार्ड में पानी के प्रभावी छिड़काव की व्यवस्था की जा रही है। परिणामस्वरूप पूरा खदान परिसर और कोल यार्ड धूल के घने गुबार में तब्दील हो गया है, जिससे यहां कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामपुर-बटुरा खदान में दिन-रात डम्परों एवं अन्य भारी वाहनों के माध्यम से खनन कार्य जारी है। वाहनों की तेज आवाजाही से सड़कों पर धूल के बादल उठ रहे हैं। इसी तरह कोल यार्ड में कोयले की लोडिंग, अनलोडिंग और स्टॉक बनाने के दौरान कोयले की काली महीन धूल हवा में फैल रही है। नियमानुसार इन सभी स्थानों पर नियमित और पर्याप्त पानी का छिड़काव होना चाहिए, लेकिन मौके पर पानी के टैंकरों की संख्या नगण्य है। जो टैंकर मौजूद भी हैं, उनका संचालन केवल औपचारिकता मात्र रह गया है। स्थायी छिड़काव प्रणाली भी बंद पड़ी हुई है। कोल यार्ड की स्थिति अधिक भयावह बताई जा रही है। यहां उड़ने वाली धूल में कोयले के सूक्ष्म कण होते हैं, जो सीधे सांस के माध्यम से फेफड़ों में प्रवेश करते हैं। यहां तैनात कर्मचारी, वाहन चालक और लोडिंग कार्य में लगे मजदूर बिना किसी सुरक्षा के इसी जहरीली धूल में 8 से 12 घंटे काम करने को मजबूर हैं। श्रमिकों ने बताया कि लगातार धूल में काम करने से उन्हें निरन्तर खांसी, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, दम घुटने और त्वचा में एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक ऐसी धूल के संपर्क में रहने से फेफड़ों से संबंधित गंभीर एवं असाध्य रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति खान अधिनियम 1952, कोयला खान विनियम 2017 और खान सुरक्षा महानिदेशालय द्वारा जारी धूल नियंत्रण संबंधी निर्देशों का खुला उल्लंघन है। नियमानुसार खदान प्रबंधन का यह दायित्व है कि वह कार्य स्थल पर धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय करे। कर्मचारियों और उनके परिजनों ने एसईसीएल प्रबंधन तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय से मांग की है कि रामपुर-बटुरा खदान और कोल यार्ड का तत्काल औचक निरीक्षण किया जाए, धूल के स्तर की जांच कराई जाए और लापरवाह जय अम्बे कंपनी के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही खदान और कोल यार्ड में पर्याप्त संख्या में पानी के टैंकर, स्थायी स्प्रिंकलर प्रणाली चालू कर नियमित छिड़काव सुनिश्चित किया जाए और यहां कार्यरत सभी कर्मचारियों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच कराई जाए।


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