एसईसीएल में 10 दिनों में 4 प्राणघातक हादसे, प्रबंधन ने जारी किए सख्त सुरक्षा निर्देश

मोहम्मद हारून धनपुरी। 

रामपुर बटुरा  सोहागपुर क्षेत्र  साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 10 दिनों के भीतर 4 प्राणघातक दुर्घटनाएं घटित होने से कंपनी में हड़कंप मच गया है। लगातार हो रहे हादसों को गंभीरता से लेते हुए एसईसीएल प्रबंधन ने सभी क्षेत्रों के संबंधित कार्य प्रभारियों को ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार रायगढ. दीपका कुसमुंडा सहित अन्य क्षेत्रों में हाल ही में डम्पर और ट्रकों से जुड़ी दुर्घटनाओं में चार श्रमिकों/कर्मचारियों की जान चली गई। इस संबंध में हरि सिंह पनवार सर, रामपुर बटुरा ओसीएम क्षेत्र द्वारा सभी क्षेत्रों को पिछले हादसों का विवरण भेजते हुए सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्रबंधन ने चार प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल अमल करने को कहा है - ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट नियमों की समीक्षा - सभी खदानों और कोल स्टॉक यार्ड में लागू ट्रैफिक नियमों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वन-वे ट्रैफिक और अलग लेन की व्यवस्था - खदानों में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग लेन बनाई जाएगी। लोडेड और खाली ट्रकों/डम्परों के लिए वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि आमने-सामने की टक्कर से बचा जा सके। डिवाइडर की व्यवस्था मुख्य ट्रांसपोर्ट रोड पर स्थायी डिवाइडर बनाना सुनिश्चित किया जाएगा। पार्किंग यार्ड और SOP की समीक्षा - ट्रकों के लिए पार्किंग यार्ड की डिजाइन में सुधार और ट्रक ट्रांसपोर्ट की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की समीक्षा कर उसे अपडेट किया जाएगा। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी एरिया महाप्रबंधकों, खान प्रबंधकों और सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इन बिंदुओं का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। गौरतलब है कि SECL कोल इंडिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादन करने वाली कंपनी है, जहां भारी-भरकम मशीनों और डम्परों की आवाजाही लगातार होती है। ऐसे में थोड़ी सी भी चूक बड़े हादसे का कारण बन जाती है। श्रमिक संगठनों ने भी प्रबंधन से मांग की है कि केवल निर्देश जारी करने से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और निगरानी बढ़ाई जाए।

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