बुढार में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, हीरा कॉलोनी और सरईकापा के दो क्लीनिक सील, एक्सपायर दवाओं का जखीरा बरामद, मरीजों की जान से हो रहा था खिलवाड़

मोहम्मद हारून उत्प्रेरक टाइम्स शहडोल।

धनपुरी-बुढार खैरहा रोड पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी दवाओं से इलाज, शासकीय कार्य में बाधा का आरोप, दो क्लीनिकों पर छापा। शहडोल जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने खैरहा रोड पर संचालित दो क्लीनिकों पर रूटीन निरीक्षण के दौरान छापा मारा। जांच के दौरान दोनों जगह गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद विभाग ने मौके से दवाइयां और दस्तावेज जब्त कर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहला मामला - डॉ. के. एम. गुप्ता क्लीनिक, हीरा कॉलोनी, खैरहा रोड बुढार:

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सबसे पहले हीरा कॉलोनी, खैरहा रोड बुढार में संचालित डॉ. के. एम. गुप्ता के क्लीनिक का निरीक्षण किया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार डॉ. के. एम. गुप्ता को स्वास्थ्य विभाग से केवल परामर्श देने की अनुमति प्राप्त थी। उन्हें किसी भी मरीज को भर्ती करने, बेड लगाकर रखने, ड्रिप चढ़ाने, इंजेक्शन लगाने या इमरजेंसी सेवा देने का कोई भी कानूनी अधिकार नहीं दिया गया था। लेकिन मौके पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत मिली। टीम ने पाया कि क्लीनिक के अंदर बाकायदा बेड लगे हुए थे और मरीजों को लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। कई मरीजों को इंजेक्शन भी लगाए जा रहे थे। यह उनकी दी गई अनुमति की शर्तों का खुला उल्लंघन है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया है। जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ। क्लीनिक के अंदर से तीन से चार महीने पहले ही एक्सपायरी हो चुकी दवाइयां बरामद हुईं। इन एक्सपायरी दवाओं का भंडारण किया गया था और आशंका है कि इन्हीं दवाओं से मरीजों का इलाज किया जा रहा था। एक्सपायरी दवा से इलाज करना गंभीर अपराध है और इससे मरीज की जान भी जा सकती है। टीम ने मौके से एक्सपायरी दवाएं, ड्रिप सेट, इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतलें, मरीजों की पर्चियां और रजिस्टर जब्त कर लिए हैं। इसी कार्रवाई के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि जांच के दौरान डॉ. के. एम. गुप्ता द्वारा कथित रूप से शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया। आरोप है कि जब टीम ने दस्तावेज मांगे तो उनके द्वारा सहयोग नहीं किया गया, दस्तावेज छिपाने का प्रयास किया गया और टीम के सदस्यों के साथ बहस की गई। इस घटना की पूरी रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में अलग से वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दूसरा मामला - अभयराज डे केयर क्लीनिक, खैरहा रोड धनपुरी:

दूसरी कार्रवाई खैरहा रोड पर ही स्थित अभयराज डे केयर क्लीनिक पर की गई। यहां भी स्थिति पूरी तरह अवैध पाई गई। जांच में सामने आया कि इस क्लीनिक का संचालन करने वाले संचालक के पास केवल बीपीटी यानी बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी की डिग्री है। चिकित्सा नियमों के अनुसार बीपीटी की डिग्री का संबंध केवल फिजियोथेरेपी से होता है। इस डिग्री के आधार पर किसी भी व्यक्ति को एलोपैथी पद्धति से मरीजों का इलाज करने, उन्हें भर्ती करने, एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां लिखने का कानूनी अधिकार नहीं मिलता है। इसके बावजूद यहां बाकायदा बेड लगाकर मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान क्लीनिक के बाहर डॉ. किरण किशोर एमबीबीएस का एक बड़ा बोर्ड लगा हुआ मिला। जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डॉ. किरण किशोर को मौके पर बुलाने को कहा तो वे मौके पर उपलब्ध नहीं मिले। क्लीनिक के स्टाफ से पूछताछ करने पर वे भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। स्थानीय लोगों ने भी अधिकारियों को बताया कि डॉ. किरण किशोर यहां नियमित रूप से नहीं आते हैं और यहां नहीं रहते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर के नाम के बोर्ड का उपयोग कर उसकी आड़ में बीपीटी डिग्रीधारी द्वारा पूरा क्लीनिक संचालित किया जा रहा था। छापे के दौरान इस क्लीनिक के अंदर भी कई मरीज भर्ती मिले, जिन्हें ड्रिप लगी हुई थी। स्वास्थ्य विभाग ने मानवता को ध्यान में रखते हुए तुरंत 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की और सभी भर्ती मरीजों को सुरक्षित रूप से शासकीय अस्पताल बुढ़ार में शिफ्ट कर दिया, ताकि उन्हें सही, सुरक्षित और अधिकृत डॉक्टरों द्वारा उपचार मिल सके। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों क्लीनिकों के खिलाफ मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एक्ट और क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और बिना वैध डिग्री और रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक संचालित करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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