मोहम्मद हारून धनपुरी। कहते हैं भाई से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता और इस रिश्ते की सबसे बड़ी मिसाल पेश करने जा रहे हैं रामपुर बटुरा ओसीएम क्षेत्र के चर्चित किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश शर्मा। अपने बड़े भाई की जान बचाने के लिए भूपेश शर्मा अपना लीवर डोनेट करने जा रहे हैं। उनका यह फैसला पूरे क्षेत्र में मानवता, त्याग और भाईचारे की मिसाल बन गया है, जिसे लोग सदियों तक याद रखेंगे।
देश भर से मिल रहा है आशीर्वाद
लीवर डोनेशन की तैयारी के बीच भूपेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा है -सच कह रहा हूं देश भर से स्नेही जनों का शुभकामना संदेश, आशीर्वाद लगातार मुझे प्राप्त हो रहा है। फोन रिसीव नहीं कर पा रहा हूं, जो कि अलाउ नहीं है। सभी को यह कहता हूं ऐसा किसी के साथ न हो, नहीं होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण ऐसा समय आता है तो इस मौके को हंसकर स्वीकार करना चाहिए। मैं अपने बड़े भाई के लिए लीवर डोनेट कर सौभाग्यशाली मानता हूं अपने को। उससे भी अच्छी बात यह है मेरी पत्नी, मेरे बच्चे इस बात को समझ कर सभी ने हौसला को बुलंद किया। मेरा पूरा परिवार मेरे साथ खड़ा हुआ है, जितने भाई, अभी बच्चे मजबूती के साथ खड़े हैं। सभी स्नेही जनों को हार्दिक धन्यवाद। उनके इस संदेश के बाद से ही पूरे शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिले सहित प्रदेश भर के किसान साथियों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के फोन और शुभकामना संदेश लगातार आ रहे हैं।
पत्नी और बच्चों ने बढ़ाया हौसला
इस कठिन और बड़े फैसले में भूपेश शर्मा को सबसे बड़ी ताकत उनके परिवार से मिली है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और बच्चों ने इस फैसले को न सिर्फ समझा बल्कि उनके हौसले को और बुलंद किया है। आज पूरा परिवार एकजुट होकर उनके साथ खड़ा है। यही एकजुटता उन्हें इस बड़े दान के लिए मानसिक रूप से मजबूत बना रही है।
कौन हैं भूपेश शर्मा
भूपेश शर्मा रामपुर बटुरा ओसीएम क्षेत्र के एक जाने-माने किसान नेता हैं। वे हमेशा किसानों के हक, मुआवजा, रोजगार और विस्थापन के मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। सामाजिक कार्यों में भी वे हमेशा आगे रहते हैं। गरीबों की मदद हो या किसी के सुख-दुख में शामिल होना, भूपेश शर्मा हमेशा सबसे आगे खड़े मिलते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र के लोग उन्हें एक नेता से ज्यादा अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।
लीवर डोनेशन क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार लीवर मानव शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो कुछ हिस्सा निकालने के बाद फिर से बढ़ जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति अपने लीवर का 60-70 प्रतिशत हिस्सा तक डोनेट कर सकता है और कुछ महीनों में दोनों का लीवर फिर से सामान्य आकार में आ जाता है। भूपेश शर्मा का यह कदम चिकित्सकीय रूप से भी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसके लिए बड़ा जिगर और हौसला चाहिए, जो उन्होंने दिखाया है।
क्षेत्र में चर्चा - भाई हो तो ऐसा
भूपेश शर्मा के इस फैसले के बाद पूरे कोयलांचल में एक ही चर्चा है - "भाई हो तो ऐसा।" लोग कह रहे हैं कि आज के दौर में जब जमीन-जायदाद के लिए भाई-भाई में विवाद होते हैं, वहां भूपेश शर्मा ने अपने बड़े भाई के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने शरीर का अंग दान करने का जो फैसला लिया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। क्षेत्र के लोगों ने उनके बड़े भाई के जल्द स्वस्थ होने और भूपेश शर्मा के सफल ऑपरेशन के लिए ईश्वर से प्रार्थना शुरू कर दी है।


0 Comments