मोहम्मद हारून उत्प्रेरक टाइम्स
धनपुरी। एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की शारदा ओपनकास्ट खदान में हो रही हैवी ब्लास्टिंग के खिलाफ आखिरकार ग्रामीणों का सब्र टूट गया। बकहो सहित आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने आज पार्षद के नेतृत्व में शारदा गेट पर धरना-प्रदर्शन चक्का जाम किया। घंटों तक चले इस से खदान का पूरा परिवहन और आवागमन ठप रहा। मौके पर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
ब्लास्टिंग से घरों की दीवारें दरक रही हैं - पार्षद
चक्काजाम का नेतृत्व कर रहे पार्षद ने कहा, "यह चक्काजाम किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनता के हित के लिए है। शारदा खदान में जो हैवी ब्लास्टिंग हो रही है, उससे स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लास्टिंग इतनी तेज होती है कि आसपास के घरों की दीवारों और छतों में दरारें आ गई हैं। कई कच्चे मकानों के तो हालात जर्जर हो गए हैं। लोग दहशत में जी रहे हैं कि कहीं मकान गिर न जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रबंधन को शिकायत दी गई, लेकिन प्रबंधन द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा है, जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है।
डस्ट से लोग हो रहे अस्थमा के शिकार
ग्रामीणों ने बताया कि खदान से उड़ने वाली धूल के कारण पूरा इलाका प्रदूषित हो गया है। घरों में, खाने-पीने की चीजों में कोयले की डस्ट बैठ रही है। इस डस्ट की वजह से यहां के लोग खासकर बच्चे और बुजुर्ग अस्थमा और सांस की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। लेकिन प्रबंधन पानी का छिड़काव भी ठीक से नहीं कर रहा है। एक किसान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारियों की शैली केवल कोयला उत्खनन तक ही सीमित है। किसानों और ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं होती। "यहां लोगों का उत्खनन नहीं करना है, यहां के लोगों को बचाना है," किसान ने कहा।
खेत के बगल में बांध, खेत बने तालाब
किसानों की एक और बड़ी समस्या खदान के पास बनाया गया बांध है। किसानों ने आरोप लगाया कि उनके खेतों के बिल्कुल बगल से एक बड़ा बांध बना दिया गया है, जिससे बारिश का सारा पानी रुक गया है। खेतों में पानी भर गया है और फसलें सड़ रही हैं। पूरा किसान इस कारण परेशान है। न तो फसल हो रही है और न ही मुआवजे की कोई सुनवाई हो रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द नहीं सुना गया और ब्लास्टिंग की तीव्रता कम नहीं की गई, घरों के नुकसान का सर्वे कर मुआवजा नहीं दिया गया और डस्ट नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो वे इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे और नेशनल हाइवे को जाम करेंगे।
प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
फिलहाल मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे गेट से नहीं हटेंगे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर एसईसीएल की जनसुनवाई और सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि जनसैलाब के इस गुस्से के बाद सोहागपुर क्षेत्र का प्रबंधन जागता है या फिर इस आंदोलन को नेशनल हाइवे तक पहुंचने का इंतजार करता है।


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