मोहम्मद हारून, शहडोल। शहडोल संसदीय क्षेत्र सहित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों, उद्योग जगत और व्यापारिक गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 9 सितंबर को हुई केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीइए) की बैठक में कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन सहित तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि इन रेल परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित किया जाएगा। तीनों परियोजनाओं के तहत करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन भी शामिल है। सरकार ने इन परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
शहडोल संभाग के लिए क्यों महत्वपूर्ण
कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड शहडोल, उमरिया और अनूपपुर सहित पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे खनिज एवं औद्योगिक उत्पादों के परिवहन का प्रमुख केंद्र है। वर्तमान में रेल लाइन पर यात्री एवं मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। चौथी लाइन के निर्माण से रेल मार्ग की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मालगाड़ियों के आवागमन को अधिक सुगम बनाया जा सकेगा। इसी प्रकार बिलासपुर- पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन शहडोल क्षेत्र को छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यापारिक केंद्रों से बेहतर ढंग से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। अतिरिक्त रेल लाइन बनने से मौजूदा रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन का दबाव कम होगा और यात्री ट्रेनों के समयबद्ध संचालन की संभावनाएं मजबूत होंगी। साथ ही भविष्य में इस मार्ग पर नई यात्री ट्रेनों के संचालन की राह भी आसान हो सकती है।
56 लाख आबादी को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के 14 जिलों के लगभग 4,790 गांवों तथा करीब 56 लाख की आबादी को मिलेगा। रेल नेटवर्क के विस्तार से पिछड़े एवं आदिवासी क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
कोयला परिवहन को मिलेगी रफ्तार
रेल लाइन की क्षमता बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा क्षेत्र के कोयला उद्योग को मिलने की संभावना है। रेलवे के अनुसार परियोजनाओं से करीब 27 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी। शहडोल-अनूपपुर क्षेत्र की खदानों से निकलने वाले कोयले को देश के विभिन्न विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने में रेल परिवहन की भूमिका और मजबूत होगी। इससे परिवहन लागत तथा समय दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा
रेल परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा बेहतर रेल कनेक्टिविटी से शहडोल संभाग और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। अमरकंटक, बांधवगढ़, अचानकमार, विराटेश्वर मंदिर और ज्वालेश्वर धाम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी बेहतर परिवहन सुविधा का लाभ मिल सकता है। रेल परिवहन के विस्तार का पर्यावरणीय लाभ भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क मार्ग से होने वाली माल ढुलाई का एक हिस्सा रेल मार्ग पर स्थानांतरित होने से ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। रेलवे के अनुमान के मुताबिक परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत तथा लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी हो सकती है। कुल मिलाकर 10,783 करोड़ रुपये की यह रेल परियोजना शहडोल संसदीय क्षेत्र के लिए केवल रेल लाइन विस्तार नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, रोजगार, उद्योग, व्यापार और पर्यटन के विकास की नई आधारशिला साबित हो सकती है। चौथी और तीसरी रेल लाइन के निर्माण से शहडोल, उमरिया और अनूपपुर सहित पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं आर्थिक गलियारों से जोड़ने में नई गति मिलने की उम्मीद है।


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