नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक मुद्दों पर समूह की साझा प्रतिबद्धता प्रमुखता से सामने आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक हुई। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ भी भारत की महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इसी दौरान ब्रिक्स देशों ने 140 बिंदुओं वाली नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दी।
मोदी-जिनपिंग बैठक पर दुनिया की नजर
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए आवश्यक बताया गया। वार्ता में व्यापार, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला, लोगों के बीच संपर्क और सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीखकर साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
आतंकवाद पर ब्रिक्स का सख्त संदेश
पहले दिन का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक दस्तावेज नई दिल्ली घोषणा रही। करीब 45 पन्नों की इस घोषणा में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, पश्चिम एशिया, ऊर्जा, वित्त और संयुक्त राष्ट्र सुधार सहित विभिन्न विषयों पर सदस्य देशों का साझा रुख सामने आया। घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की गई। सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाह मिलने की चुनौती से निपटने का संकल्प दोहराया गया। घोषणा में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की भी स्पष्ट निंदा की गई। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और आतंकियों तथा उनके सहयोगियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
एआई, साइबर और अंतरिक्ष पर भारत का जोर
ब्रिक्स के एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। घोषणा में सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी और जिम्मेदार एआई विकास की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत ने एआई, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी का मुद्दा उठाया।
डिजिटल ढांचे और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
नई दिल्ली घोषणा में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को साझा करने और उसके इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में सहयोग पर सहमति बनी। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क विकसित करने की पहल पर भी जोर दिया गया। भारत में ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता केंद्र स्थापित करने का स्वागत किया गया। इससे छोटे उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र को नई तकनीक अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और निवेश पर भी रहा फोकस
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में व्यापार, निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विस्तारित ब्रिक्स में दुनिया की करीब आधी आबादी शामिल है और समूह का वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान है। भारत ने ब्रिक्स को केवल राजनीतिक संवाद का मंच न बनाकर व्यावहारिक आर्थिक सहयोग का माध्यम बनाने पर जोर दिया। कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक, छोटे उद्योग, बुनियादी ढांचे और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
गाला डिनर में दिखी भारतीय संस्कृति
पहले दिन का समापन भारत मंडपम में आयोजित गाला डिनर से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया। मेहमानों को भारतीय व्यंजनों के साथ श्री अन्न यानी मोटे अनाज से तैयार भोजन भी परोसा गया।
2027 में चीन करेगा ब्रिक्स की मेजबानी
अगले ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी पहले दिन तस्वीर साफ हुई। चीन 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए चीन की भूमिका जारी रखने की बात कही।


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